स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रणय साहित्यिक दर्पण द्वारा  “राष्ट्रीय कवि सम्मेलन” का शानदार आयोजन सम्पन्न

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ब्यूरो- अमित मिश्रा

 

सीतापुर (दि ग्राम टुडे)

 

“प्रणय साहित्यिक दर्पण” (भारत सरकार द्वारा पंजीकृत संस्था) द्वारा स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर शाम 4:00 बजे ऑनलाइन “राष्ट्रीय कवि सम्मेलन” का आयोजन किया गया। इस लाइव आयोजन की रूपरेखा संस्था के संस्थापक/ रा. अध्यक्ष इंजी. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव “प्रणय” द्वारा तैयार की गई। इस 80वें जश्न-ऐ-आजादी के आयोजन की शुरुआत अपने निर्धारित समय पर की गई। प्रतिभागी कवि/ कवयित्रियों की संख्या अधिक होने के कारण पूरे आयोजन को तीन सत्रों में विभाजित किया गया। प्रथम सत्र संचालन डॉ निधि बोथरा जैन इस्लामपुर पश्चिम बंगाल, द्वितीय सत्र संचालन पुरुषोत्तम लाल तिवारी सागर मध्य प्रदेश, तृतीय सत्र संचालन डॉ प्रियंबदा मिश्रा पटना बिहार द्वारा किया गया। इस आयोजन में देश के अनेक प्रतिष्ठित कवि/कवयित्रयों ने सहभागिता की।

 

जोधपुर राजस्थान की वरिष्ठ कवयित्री सरिता श्रीवास्तव ने सुमधुर स्वर से मां सरस्वती की वंदना कर पटल पर उन्हें विराजित किया। डॉ निघि बोथरा जैन द्वारा शानदार प्रस्तावना के साथ संस्था द्वारा संचालित सभी कार्यकर्मों की संक्षिप्त जानकारी दी गई। तत्पश्चात डॉ निधि जैन ने संस्था के संस्थापक प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव प्रणय को संक्षिप्त उद्बोधन एवं सभी अतिथियों के स्वागत अभिनंदन हेतु आमंत्रित किया। प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव “प्रणय” ने मां वीणा वादिनी एवं भगवान भोलेनाथ के चरणों में प्रणाम करते हुए कार्यक्रम अध्यक्ष भारत माता को नमन वंदन किया और मुख्य अतिथि डॉ रामदेव शर्मा राही सहित सभी अतिथियों का स्वागत अभिनंदन कर सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाएं दीं । मुख्य अतिथि रामदेव शर्मा राही मथुरा उत्तर प्रदेश के संक्षिप्त उद्बोधन के पश्चात कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की गई।

 

प्रथम सत्र में डॉ निधि बोथरा जैन इस्लामपुर पश्चिम बंगाल के संचालन में प्रथम कवयित्री के रूप में नीलम पाण्डेय लखनऊ ने काव्य पाठ किया। तत्पश्चात उषा कंसल बैंगलोर, मनोज मंजुल कासगंज उत्तर प्रदेश, मिलन विश्वकर्मा उन्नाव उत्तर प्रदेश, मंजरी श्रीवास्तव लज्जा गाजियाबाद, शैलेन्द्र कुमार अम्बष्ट वाराणसी, डॉ.मधुकर राव लारोकर मधुर नागपुर (महाराष्ट्र), सरिता श्रीवास्तव जोधपुर राजस्थान, कविता मालपानी अमरावती, त्रिभुवन शंकर मिश्र कानपुर उ.प्र., अंशिका गुप्ता “स्मिता” लखनऊ उत्तर प्रदेश, पुरुषोत्तम लाल तिवारी सागर मध्य प्रदेश द्वारा काव्य पाठ किया गया।

 

द्वितीय सत्र में पुरुषोत्तम लाल तिवारी सागर मध्य प्रदेश के संचालन में डॉ निधि बोथरा जैन इस्लामपुर प. बंगाल, इन्द्रपाल द्विवेदी मैहर मध्य प्रदेश, डॉ मधु स्वामी गाजियाबाद, मुल्क राज “आकाश” गाजियाबाद उत्तर प्रदेश, किरन अग्रवाल प्रतापगढ़ यूपी, डॉ.भेरूसिंह चौहान झाबुआ (मध्य प्रदेश), डॉ दिवाकर पाठक हजारीबाग झारखंड, विष्णु शंकर मीणा कोटा राजस्थान, डॉ. रामदेव शर्मा “राही” मथुरा उत्तर प्रदेश, डाॅ० शशि जायसवाल प्रयागराज उत्तर प्रदेश, डॉ प्रियंबदा मिश्रा पटना बिहार द्वारा काव्य पाठ किया गया।

 

तृतीय सत्र डॉ प्रियंबदा मिश्रा के संचालन में अरविन्द कुमार “अनोखे” उन्नाव उत्तर प्रदेश, अनीता वाजपेई वर्धा महाराष्ट्र, रेखा पांडेय यशी उन्नाव उत्तर प्रदेश, छोटेलाल सिंह रायबरेली, डॉ नमिता लोहानी पटना बिहार, सुनील श्रीवास्तव अमेठी उ. प्र., अवधेश श्रीवास्तव उन्नाव उत्तर प्रदेश, डॉ मधुसूदन तिवारी मुम्बई महाराष्ट, डॉ मीना कुमारी परिहार बिहार, बशिष्ट नारायण सिंह ग्रेटर नोएडा, प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव प्रणय सीतापुर उत्तर प्रदेश के द्वारा काव्य प्रस्तुतियां दी गईं। सभी मनीषियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुतियों से पटल को सुशोभित किया। सभी की सुंदर और शानदार प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को उत्कृष्टता के शिखर पर पहुंचा दिया। श्रोता के रूप में जुड़े साथियों ने अपनी स्नेहिल टिप्पणियों के द्वारा सभी का उत्साह वर्धन किया।

 

पूर्व निर्धारित रूप रेखा के अनुसार आयोजन के अंत में मुख्य अतिथि रामदेव शर्मा राही ने सभी कवि/कवयित्रियों की प्रस्तुतियों की समीक्षा करते हुए आयोजन पर अपने विचार व्यक्त किये। सभी ने आयोजन की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव प्रणय को शानदार आयोजन के लिए ढेर सारी बधाइयां और शुभकामनाएं देकर उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की। रा. संयोजक बशिष्ट नारायण सिंह द्वारा सभी अतिथियों का धन्यवाद आभार व्यक्त किया गया। तदुपरांत जय हिंद जय भारत के उद्घोष के साथ आयोजन विराम की घोषणा की। आयोजन अपने निर्धारित समय शाम 4:00 बजे शुरू होकर रात्रि 8:00 बजे विधिवत संपन्न हुआ।

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कतर्नियाघाट की दो रेंजों में खाली रेंजर की कुर्सी, बढ़े वन्यजीव हमले मोतीपुर और मुर्तिहा रेंज अतिरिक्त प्रभार के भरोसे, संवेदनशील इलाकों में निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल मिथिलेश जायसवाल मोतीपुर बहराइच। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग क्षेत्र में इन दिनों वन्यजीवों के हमले में वृद्धि हुई है जिससे ग्रामीण दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं वहीं वन विभाग के पास दो रेंज अफसर की कमी के चलते वन्य जीव संरक्षण तथा मानव वन्य जीव संघर्ष रोकने पर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में वन्यजीवों के लगातार बढ़ते हमलों के बीच मोतीपुर और मुर्तिहा रेंज में वन क्षेत्राधिकारी के पद करीब एक माह से अधिक समय से खाली हैं। दोनों संवेदनशील और बड़े क्षेत्रफल वाली रेंजों का संचालन अतिरिक्त प्रभार के भरोसे किया जा रहा है। ऐसे में वन्यजीवों की निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। करीब दो माह पूर्व वन विभाग ने वन क्षेत्राधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले किए थे। कतर्नियाघाट की सात रेंजों में से पांच के वन क्षेत्राधिकारियों का स्थानांतरण हुआ। इनमें मोतीपुर के वन क्षेत्राधिकारी सुरेंद्र कुमार तिवारी और मुर्तिहा के वन क्षेत्राधिकारी रत्नेश कुमार भी शामिल थे। दोनों के गैरजनपद स्थानांतरण के बाद इन रेंजों में अब तक स्थायी तैनाती नहीं हो सकी है। मोतीपुर रेंज का अतिरिक्त प्रभार ककरहा के वन क्षेत्राधिकारी केके सिंह को, जबकि मुर्तिहा का अतिरिक्त प्रभार धर्मापुर के वन क्षेत्राधिकारी दीपक मिश्रा को सौंपा गया है। अपने मूल क्षेत्र के साथ अतिरिक्त रेंज की जिम्मेदारी संभालने के कारण अधिकारियों के सामने दोनों क्षेत्रों की नियमित निगरानी बड़ी चुनौती बनी हुई है। हमलों के बीच व्यवस्था पर सवाल कतर्नियाघाट क्षेत्र में लगातार तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों की आबादी में आवाजाही और हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में संवेदनशील रेंजों में स्थायी वन क्षेत्राधिकारी नहीं होने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव की सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचना, गश्त बढ़ाना और ग्रामीणों को सतर्क करना बेहद जरूरी है, लेकिन अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था में यह काम प्रभावित हो सकता है। मोतीपुर और मुर्तिहा दोनों ही रेंज जंगल से सटे बड़ी आबादी वाले इलाकों को कवर करती हैं। ऐसे में यहां स्थायी रेंजर की तैनाती को लेकर विभाग की उदासीनता वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के बीच गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों में चर्चा है कि वन विभाग के उच्चाधिकारियों को सुरक्षा के मद्देनजर दोनों रेंजों में जल्द स्थायी वन क्षेत्राधिकारियों की तैनाती करनी चाहिए ताकि वन्यजीवों की निगरानी मजबूत होने के साथ ही हमले की घटनाओं पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो सके। आपको बताते चले कि पिछले दिनों मोतीपुर और मुर्तिहा रेंज में कई स्थानों पर वन्यजीवों के हमले हो चुके हैं जिसमें कई लोगों की जान भी जा चुकी है।

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