146 साल में सबसे सूखा जून बनने की आशंका, ‘गॉडजिला अल नीनो’ से भारत में सूखे और महंगाई का खतरा गहराया

Date:

दि ग्राम टुडे, कानपुर।
देश में मानसून की कमजोर शुरुआत और लगातार कम होती बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक जून 2026 पिछले 146 वर्षों में सबसे सूखा जून साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में तेजी से बन रहा शक्तिशाली ‘गॉडजिला अल नीनो’ भारत समेत पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर सकता है। अगर हालात नहीं सुधरे तो देश में सूखा, फसल संकट, पानी की कमी और महंगाई जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
4 जून से 23 जून 2026 के बीच देशभर में केवल 56.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 104.6 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यानी अब तक करीब 46 प्रतिशत कम बारिश हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी अपने मानसून पूर्वानुमान को घटाकर सामान्य से 90 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह अनुमान 92 प्रतिशत था। मौसम विभाग का कहना है कि इस साल सामान्य से कम बारिश होने की आशंका 84 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। नासा द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों में मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में असामान्य गर्मी देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1997-98 के बाद पहली बार ऐसी स्थिति बन रही है। उस समय बना ‘गॉडजिला अल नीनो’ दुनिया के सबसे खतरनाक मौसमीय घटनाक्रमों में से एक माना गया था, जिसने कई देशों में सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी पैदा की थी।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अल नीनो ऐसी स्थिति होती है, जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे समुद्री हवाओं और मानसूनी सिस्टम पर असर पड़ता है। भारत में इसका सीधा असर मानसून पर पड़ता है, क्योंकि हिंद महासागर से आने वाली नमी कमजोर हो जाती है और बारिश कम होने लगती है।
इस बार महाराष्ट्र और गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हैं, जहां 85 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई है। मेघालय में 81 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 71 प्रतिशत तक बारिश कम हुई है। मध्य प्रदेश में 58 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश के 34 जिलों में भी सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। कर्नाटक, तेलंगाना और बिहार जैसे राज्यों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे ज्यादा खतरा खेती और किसानों पर मंडरा रहा है। भारत की लगभग आधी आबादी खेती पर निर्भर है और खरीफ फसलें पूरी तरह मानसून पर टिकी होती हैं। चावल, दाल, सोयाबीन, कपास, मक्का और मूंगफली जैसी फसलें समय पर बारिश नहीं होने से प्रभावित हो सकती हैं। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने भी चेतावनी दी है कि अल नीनो की वजह से बारिश आधारित फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
कम बारिश का असर सीधे महंगाई पर भी पड़ सकता है। खाद्य पदार्थ भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का करीब 37 प्रतिशत हिस्सा हैं। यदि फसल उत्पादन घटता है तो चावल, दाल, सब्जियों और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो वाले वर्षों में खाद्य महंगाई सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक रहती है।
हालांकि राहत की बात यह है कि देश के कई बड़े जलाशय अभी पिछले 10 वर्षों के औसत से अधिक भरे हुए हैं, जिससे शुरुआती सिंचाई में कुछ मदद मिल सकती है। लेकिन दक्षिण भारत और पूर्वी राज्यों के कई जलाशयों में जल स्तर सामान्य से कम है। अगर अगले कुछ सप्ताह में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो पीने के पानी का संकट भी गहरा सकता है।
केंद्र सरकार ने संभावित सूखे को देखते हुए 150 से 200 जिलों को ‘प्रायोरिटी मॉनिटरिंग’ में रखा है। किसानों को कम पानी वाली फसलें, सूखा-रोधी बीज और नमी बचाने के उपाय सुझाए जा रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (IWMI) ने किसानों के लिए ‘सुखरक्षक’ नाम का AI आधारित सूखा चेतावनी सिस्टम भी तैयार किया है, जो कई भारतीय भाषाओं में किसानों को सलाह दे रहा है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो की संभावना 80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि नवंबर तक इसके और मजबूत होने की आशंका जताई गई है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. सुनील पांडेय का कहना है कि अगले छह सप्ताह की बारिश यह तय करेगी कि देश सूखे की ओर बढ़ेगा या हालात संभल जाएंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

लेटेस्ट खबरें

गांव-समाज की खबरें
Related

2 अगस्त को होगा भव्य पौधारोपण अभियान

दि ग्राम टुडे,कानपुर। पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के...

5.72 लाख हस्ताक्षरों के साथ राष्ट्रीय गौ माता घोषित करने की मांग, डीएम को सौंपा गया ज्ञापन

    संवाददाता - बीरेश तिवारी   सीतापुर (दि ग्राम टुडे )'गौ सम्मान...

नहर में मिला सीतापुर निवासी का शव, चार दिन से था लापता

  पारा पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा, मौत...