रुड़की। महिला काव्य मंच की रुड़की इकाई की मासिक काव्य गोष्ठी, हिन्दी दिवस की पूर्व संध्या एवं मंच की द्वितीय वर्षगांठ के अवसर पर होटल दीप रेजिडेंसी में गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच की सक्रिय सदस्या शाहिदा शेख ने की।
महिला काव्य मंच की स्थापना 22 अगस्त 2024 को हुई थी तथा 13 सितंबर को इसकी प्रथम गोष्ठी आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का शुभारंभ अलका धनशाला द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के सुंदर गायन से हुआ।
इस अवसर पर मंच की अध्यक्ष अर्चना त्यागी ने इकाई की नवनिर्मित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के नामों की घोषणा की। बुशरा तबस्सुम को उपाध्यक्ष, अनुपमा को संयुक्त उपाध्यक्ष, अलका धनशाला को महासचिव, ममता चंद्रा को सचिव तथा निधि को संयुक्त सचिव का दायित्व सौंपा गया। सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मृणालिनी शर्मा एवं शाहिदा शेख, सांस्कृतिक समन्वय के लिए वीना सिंह तथा पटल संचालन के लिए कविता गोयल को जिम्मेदारी दी गई।
इसके बाद आयोजित काव्य गोष्ठी में कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्यिक एवं भावनात्मक रंग बिखेरे। अलका धनशाला ने गैर ज़रूरी काम कविता से काव्य पाठ का शुभारंभ किया। मृणालिनी शर्मा ने सुहानी सांझ प्रस्तुत की। सहारनपुर से विशेष रूप से पहुंचीं सूफिया ने ग़ज़ल प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं शाहिदा शेख ने प्रकृति की शिक्षा कविता प्रस्तुत की, जबकि अर्चना त्यागी ने दुनिया जीत ली मैंने के माध्यम से कार्यक्रम में ऊर्जा का संचार किया। अनुपमा ने राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति अपनी भावनाओं को रचना के माध्यम से व्यक्त किया। बुशरा तबस्सुम ने नाराज़गी का रंग पीला तथा ममता चंद्रा ने कैसे भूल जाऊं तुम्हें कविता का सुंदर वाचन किया। वहीं वीना सिंह ने पहाड़ों में बसे गांवों में अपनी संतानों की प्रतीक्षा करते वृद्ध माता-पिता की पीड़ा को मार्मिक कविता के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही शाहिदा शेख ने सभी अतिथियों एवं सदस्याओं का आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात अल्पाहार एवं आपसी संवाद के साथ साहित्यिक गोष्ठी का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
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