रास्ते हसीं और आसान नहीं होते,
सच्चाई की राह पर कभी फूल नहीं होते।
कैसे बचोगे तुम इस दुनिया की साज़िशों से,
अगर ज़माने में तुम सच्चे वफ़ादार हो?
ढहा दिए जाते हैं अक्सर खड़े हुए साए,
लोग तुम्हें पल में गिराकर चले जाएँगे,
अगर किसी मज़बूत सहारे की दीवार हो।
अपने भी मोड़ लेते हैं मुँह अक्सर यहाँ,
कोई हाल तक पूछने नहीं आएगा तुम्हारा,
अगर तुम अपनी ही ज़िंदगी में बेरोज़गार हो।
टूटे हुए भी लोग अक्सर याद रखते हैं,
दूर के रिश्ते भी बड़े चाव से निभाते हैं,
बशर्ते तुम्हारे पास दौलत बेशुमार हो।
यहाँ झुकने का थोड़ा हुनर सीख लो साहब,
वरना इस दौड़ में बहुत पीछे छूट जाओगे,
अगर तुम अपनी बात पर अड़े खुददार हो।
🖋️ डॉ आशीष मिश्र उर्वर
कादीपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश






