अल्जाइमर एवं डिमेंशिया : स्मृति की रक्षा, संवेदना और समग्र देखभाल ही बचाव की दिशा*
*लेखक : डॉ. रूप कुमार बनर्जी, होम्योपैथिक चिकित्सक, गोरखपुर*
उम्र बढ़ने के साथ कभी-कभी कुछ भूल जाना सामान्य माना जाता है, लेकिन जब भूलने की समस्या लगातार बढ़ने लगे, परिचित लोगों या स्थानों को पहचानने में कठिनाई होने लगे, बातचीत और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगे अथवा रोजमर्रा के कार्यों में परेशानी आने लगे, तो इसे सामान्य वृद्धावस्था समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह डिमेंशिया अथवा अल्जाइमर रोग का शुरुआती संकेत हो सकता है।
अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे सामान्य कारण है और लगभग 60 से 70 प्रतिशत मामलों में इसकी भूमिका होती है। डिमेंशिया केवल याददाश्त की समस्या नहीं है, यह सोचने, समझने, भाषा, व्यवहार तथा दैनिक जीवन की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है।
*भूलने से आगे की बीमारी – इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज*
– बार-बार एक ही प्रश्न पूछना
– वस्तुएं रखकर भूल जाना
– परिचित रास्ते में भटक जाना
– सही शब्द खोजने में कठिनाई
– समय और स्थान को लेकर भ्रम
– निर्णय लेने में परेशानी और स्वभाव में असामान्य परिवर्तन
ये ऐसे संकेत हैं जिन पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। प्रारंभिक मूल्यांकन इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि स्मृति में कमी के पीछे हमेशा अल्जाइमर ही कारण नहीं होता। कई अन्य चिकित्सकीय स्थितियां भी संज्ञानात्मक क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
*होम्योपैथी : व्यक्ति-केंद्रित समग्र दृष्टिकोण*
होम्योपैथी में रोगी का मूल्यांकन केवल एक शिकायत के आधार पर नहीं, बल्कि उसके समग्र लक्षण-समूह, मानसिक एवं भावनात्मक स्थिति, नींद, व्यवहार तथा अन्य शारीरिक लक्षणों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
अल्जाइमर एवं डिमेंशिया की समग्र देखभाल में होम्योपैथिक चिकित्सक रोगी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं का आकलन करते हुए नींद, चिंता, बेचैनी, भय, चिड़चिड़ापन अथवा अन्य साथ चल रही समस्याओं पर विशेष ध्यान देता है।
होम्योपैथी ही एकमात्र ऐसी विधा है जिसमें चिकित्सक धैर्यपूर्वक मरीज एवं उनके तीमारदारों की बात सुनते हैं, उनसे लक्षण पूछते हैं और लक्षणों के हिसाब से दवा देते हैं। अल्जाइमर में कई होम्योपैथिक दवाइयां और मदर टिंक्चर ऐसी हैं जिनका सुयोग्य होम्योपैथिक चिकित्सक सही चुनाव करके मरीज को दें तो निश्चित रूप से आराम मिल सकता है। इसके साथ ही रोगी की नियमित चिकित्सा, सुरक्षा, पोषण और जीवनशैली संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखना भी महत्वपूर्ण है।
*मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए जीवनशैली सबसे महत्वपूर्ण*
डिमेंशिया के जोखिम को कम करने में स्वस्थ जीवनशैली की अहम भूमिका है।
1. नियमित शारीरिक गतिविधि और पैदल चलना
2. संतुलित और पौष्टिक आहार
3. धूम्रपान से बचाव
4. सामाजिक एवं मानसिक रूप से सक्रिय रहना
5. रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल का उचित नियंत्रण
6. पर्याप्त नींद और श्रवण क्षमता में कमी होने पर उसका समय से उपचार
*रोगी को दवा से अधिक समझ और सम्मान की जरूरत*
अल्जाइमर रोगी को बार-बार भूलने के लिए डांटना या उसकी गलती पर नाराज होना समस्या को कम नहीं करता। शांत व्यवहार, नियमित दिनचर्या, सुरक्षित वातावरण और सम्मानजनक संवाद उसकी देखभाल के महत्वपूर्ण आधार हैं।
परिवार को यह समझना चाहिए कि रोगी की भूलने की समस्या अक्सर उसके नियंत्रण में नहीं होती। इसलिए धैर्य, संवेदना और चिकित्सकीय मार्गदर्शन उपचार एवं देखभाल की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हैं।
अल्जाइमर के प्रति जागरूकता का अर्थ केवल बीमारी को पहचानना नहीं, बल्कि समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना, जोखिम कारकों को नियंत्रित करना और रोगी की गरिमा बनाए रखना भी है।
> *”भूलने के लक्षणों को नजरअंदाज न करें, समय पर पहचानें, उचित चिकित्सा लें और रोगी का सम्मान बनाए रखें। स्मृति कमजोर हो सकती है, लेकिन व्यक्ति का सम्मान और उसका मानवीय अस्तित्व कभी कमजोर नहीं होना चाहिए।”*






