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तू साथ है प्रभु,

हैं सब साथ मेरे।

छँट जाएँ पीड़ा के,

सब बादल घनेरे।

 

झुका माथ जब ,

तेरे दर पे मैं आया।

तेरी कृपा का,

फल मैंने पाया।

मुरादों की झोली,

भरी दाता मेरे।

जो तू साथ है प्रभु,

हैं सब साथ मेरे।

 

बिन माँगे दे दे ,

बिन कहे तू सुनता।

तू दयालु बड़ा है,

क्षमा सबको करता।

काट मोह-माया के

सकल बंध ये मेरे।

 

जो तू साथ है,

हैं सब साथ मेरे।

छँट जाएँ पीड़ा के

सब बादल घनेरे।

 

कण-कण में जग के,

तेरा नूर छाया।

चराचर जगत सब,

है तेरी माया।

प्रभु तुझसे ही हैं ,

सब उजले सवेरे।

 

जो तू साथ है प्रभु,

हैं सब साथ मेरे

छँट जाएँ पीड़ा के,

ये बादल घनेरे।

 

जीवन- नैया मेरी,

तू पार लगा दे

न सूझे मुझे कुछ,

तू राह दिखा दे।

रख दे प्रभु अब,

सिर पर हाथ मेरे।

 

जो तू साथ है

तो सब साथ मेरे।

छँट जाएँ पीड़ा के,

सब बादल घनेरे।

 

न तीरथ मैं जानूंँ  ,

न जानूँ मै मंदिर।

जानू बस इतना,

कि तू सबके अंदर।

बने मेरे मन में,

प्रभु तेरे बसेरे।

 

जो तू साथ है प्रभु ,

हैं सब साथ मेरे।

छँट जाएँ पीड़ा के

ये बादल घनेरे। ।

 

न दीपक,न चंदन,

न पूजा की थाली।

तेरे दर पे आया मैं,

ले हाथ खाली।

भजन-कीर्तन ,

आरती मैं न जानूँ ।

भाव -सुमन ही,

स्वीकारो तुम मेरे।

 

जो तू साथ है,

हैं सब साथ मेरे।

छँट जाएँ पीड़ा के

ये बादल घनेरे।

 

वीणा गुप्त

नई दिल्ली

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