ये छप चुका है 

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निराकार का रूप सजाना।

बुद्धिमान तह मिले खजाना।।

सृष्टि रची जिसने यह सारी।

उसकी महिमा है अति भारी।।

 

राम नाम सुखदाई लगता।

जीवन में यह आशा भरता।।

नाम जपो नित शाम सबेरे।

मिट जाए तब जग के फेरे।।

 

चरण शरण में है जो प्राणी।

भव विपदा सब हर कल्याणी।।

मैं बालक नादान परिंदा।

बचा मुझे मांँ जग परनिंदा।।

 

सुख वैभव तो मिले घनेरे।

अब पाना है दर्शन तेरे।।

मुक्ति धाम की राह दिखाना।

प्रेम सुधा रस मुझे पिलाना।।

 

पाप कर्म से मुझे बचाना।

सत की मन में ज्योत जगाना।।

भक्ति भाव प्रभु मुझे सिखाना।

दर तेरा प्रभु अंत ठिकाना।।

 

राह प्रभु निज धाम दिखा दो।

लोभ मोह जंजाल मिटा दो।।

धन्य हुआ यह जीवन अपना।

चरण शरण ही है अब सपना।।

 

 

नीलम अग्रवाल रत्न

🙏🙏

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