अपनी संतान की मुस्कान में -माँ
सदा अपना संसार सजाती है,
उसकी हर छोटी खुशीयों पर,
मन ही मन मुस्कुराती है,
व्रत की कठिन डगर पर,
माँ स्वयं को भूल गई -और,
संतान की लंबी उम्र की खातिर,
अपनी हर पीड़ा को भूल गई,
बस मन में एक ही प्रार्थना कि,
सदा सुखी रहे मेरी संतान,
हे प्रभु ! बस एक ही विनती है तुझसे,
मेरी झोली अपने आशीष से भर देना,
बच्चों के जीवन से हर संकट को हर लेना,
आज जियुतिया के पावन दिन पर,
हर माँ यही वर मांगती है कि,
मेरा बच्चा सदा रहे सलामत,
क्योंकि…,
यही है ममता -यही तपस्या..,
यही है माँ का सच्चा प्यार,
जो संतान के सुख में ही बसता है,
एक माँ का पूरा संसार ||
शशि कांत श्रीवास्तव
डेराबस्सी मोहाली, पंजाब
स्वरचित मौलिक रचना
03-10-2026






