विविध

तू सबको ज्ञान देता है, तू पालनहार है सबका, सभी इन्सान के जीवन का बेड़ा पार करता है। सभी प्राणी तेरे बन्दे, तुम्हीं प्राणेश हो सबके, सभी...

शिल्प देव

शिल्प -ज्ञान विज्ञान अपरिमित, इसके वर्णन का ना है पारावार । शिल्प गुरू भारत कहलाता था, अभिनंदन करता नित संसार ।। शिल्प देवता विश्वकर्मण अनुपम, जिनकी महिमा है अथक...

चरणों शीश झुकाता

प्रथम पूज्य की करे अर्चना, रिद्धि-सिद्धि के है दाता । दयावंत हे बुद्धि प्रदायक, जन-जन के भाग्य विधाता ।।   प्रथम पूज्य को प्रथम निमंत्रण, नत मस्तक...

संचेतना-जागृत-जागृति

अंतर्मन असुप्त अवस्था में हो,तब ये जागृति आती है। ईश कृपा से सभी मानव में,चेतना संचेतना आती है।।   मन बुद्धि आत्मा ये प्रसन्न,इंसाँ जागरूक हो जाता...

ख्यात साहित्य साधक

ख्यात साहित्य साधक अपने जीवन में आरम्भ से ही कुछ अलग रंग में जीते हैं और यह बात उनके घी वालो को भी पता नहीं केवल...

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