मैंने पूछा—“हिंदी! कहो, क्या तुम्हें कभी राष्ट्रभाषा कहा जाएगा?”
वह मुस्कुराई—“नहीं, अभी तो मेरे हिस्से में बस प्रतीक्षा का वनवास है।”
मैंने फिर पूछा—“फिर तुम्हारा भविष्य...
वरि. कवि सुरेश चंद्र जोशी के जन्मोत्सव पर 'त्वदीयं वस्तु तुभ्यमेव समर्पये' ई पत्रिका का विमोचन सम्पन्न नवोदय वैश्विक प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी/कवि/साहित्यिकार...
लेखन में छायावादी संवेदना और विविध विषयों पर सार्थक कविता-सृजन के लिए मिला सम्मान।
उत्तराखंड की शिक्षिका, लेखिका एवं कवयित्री डॉ.लक्ष्मी चौहान 'रोशनी' को साहित्य...