बस आज नहीं , सब दिन हमारा हिन्दी-दिवस,
यही हमारी मातृभाषा, फिर हम क्यों हों विवश।
वैज्ञानिकता से परिपूरित,देववाणी की तनया,
मिठास से भरी हुई,सरल,सुगम समाहित करती...
गूंज रही हर घर आंगन में,
गणपति की जयकार।
भाद्रपद की पावन बेला,
लेकर आई खुशियों की बहार।
रिद्धि सिद्धि संग खुशियां लाए,
मां पार्वती के दुलारे।
मंगल मूर्ति बनाकर...
हे माँ, गीर्वाणभारती की आत्मजा।
स्वीकारे हैं तुम्हें सारे भारत की प्रजा।
द्वाविंशति भाषाओं की हो तुम भगिनी।
भाषाई सौहार्दता की नित पुष्करणी।
स्वतंत्रता संग्राम में भी रही...