विविध

तेरा इंतजार  

तुझे पीपल के पत्ते पे!! रोज एक खत लिखती पिया !!   तकिया हाथों का लगाती बिछोंना माटी का बनाती   रातों को सितारों से करती !! तेरे प्यार की मीठी...

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को उनके जन्मदिवस पर काव्यांजलि

काशी की पावन धरती पर जन्मे भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (युगद्रष्टा) को मेरी यह छोटी-सी काव्यांजलि आपको निवेदित करता हूँ।   काशी की पावन धरती पर, एक प्रभात सुनहरा...

भारतेन्दु हरिश्चंद्र

काशी की पावन माटी में जन्मा वह युग-निर्माता था, अल्पायु पाकर भी जो नवयुग का भाग्य-विधाता था। सोए जनमानस को जिसने अपनी लेखनी से जगा दिया, निज...

कुंज समीक्षक की नजर में

सुप्रसिद्ध कवि डॉ अर्जुन गुप्ता 'गुंजन' की सद्य प्रकाशित पुस्तक "कवनीत-कुंज" (छंदबद्ध गीत-संग्रह) की समीक्षा करने का प्रयास मैने किया है, जो निम्नवत् है। 1....

नवगीत

मशीनों के जंगल में मुखड़ा कल की नस में आज बहे, मन का अपना रक्त रहे, मशीनों के जंगल में भी मन का एक वृक्ष रहे।   नीली-नीली स्क्रीनें हों, खिड़की पर...

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