ऋषि पंचमी 

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महातपस्वी सप्त ऋषी की छवि अनमोल निराली,

गगन में दिखते ये सभी ऋषी

आज भी पावन आली,

शिक्षा और सीख है मिलती

इन ऋषियों महायोगियों से

वाल्मीकि को राह दिखाई, इन्ही ने,रामायण रची प्रभु जी वाली।।

 

कश्यप,अत्रि,भारद्वाज मुनि

विश्वामित्र श्रेष्ठ ज्ञानी विज्ञानी

गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ सहित शोभा सप्त ऋषी वाली,

नमन सदा इन सप्त ऋषी को

ज्ञान ध्यान के दाता,

स्मरण करें हम सब मिल इनका,ऋषि परंपरा वैभवशाली।।

 

भाद्रपद की शुक्ल पंचमी, तिथी बढ़ी ही पावन है

पवित्र स्वच्छ मन से दीप जलाएं मूर्ति बड़ी सुहावन है

मन के तम को दूर भगाएं

पाप मुक्ति का सेतु हैं ये

पूजा और अर्चना करके,फल पाएं हम मनभावन।।

 

तपस्या और संयम का व्रत है

जीवन को पावन करता,

श्रृद्धा से शीश नवाते जब मन

आदर से नित भरता

सप्त ऋषी के आशीष से हम सब सदा सुरक्षित रक्षित रहते

प्रस्फुटित ज्ञान की लौ होती,

वाल्मीकि सदृश है यश मिलता।।

 

अवधेश कुमार श्रीवास्तव उन्नाव उत्तर प्रदेश

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