भादव माह शुक्ल पक्ष चतुर्थी, गणेश चतुर्थी पर्व पर अवतरित हुए गणेश, उमानंदन ।
सूर्यकोटि समप्रभा तेजस्वी गजानन प्रभु , जग करे वंदन ।
प्रथम पूज्य देव हमारे गणेश गजानन ,करूं आरती अभिनंदन।
हरी दूर्वा चढ़ाऊँ, तिलक करूं सिंदूर चंदन ।
हरे -पीले -लाल वस्त्र पहनाऊं , पुष्प हार से करूं स्वागत- अभिनंदन।
लड्डू -मोदक खूब खिलाऊं, आ जाओ गिरिजा नंदन ।
मंगलमय हो भक्तों का जीवन, प्रार्थना करूं हे शिवनंदन।
विघ्न विनाशक ,रिद्धि- सिद्धि, शुभ- लाभ प्रदाता गौरी नंदन ।
तन -मन में उमंग -तरंग देना, सिंदूर वदन गणेश, करूं अभिनंदन ।
विश्व में छाया अज्ञान अंधेरा, मिटा दो अशांति क्रंदन ।
शक्ति -भक्ति का जयकारा गूंजे, वक्रतुंड महाकाय लंबोदर ,मैं करूं अभिनंदन।
झोली खुशियों से भर दो ,आमोद- प्रमोद से चहके घर -मन का आंगन।
सुख -समृद्धि ,विकास देना देश को, भारत का विश्व में हो अभिनंदन।
हाथ जोड़ विनती करूं सुनो ,कृपा बरसाओ गणेश, शिव शंकर नंदन ।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश






