जीवन उपहार हो जाएगा

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मत करो तारीफ़ इतनी,

मत चढ़ाओ आसमां पर,

हमको खुमार हो जाएगा।

ज़माना जब कमियां गिनेगा,

जीना दुश्वार हो जाएगा।

 

मैं जो हूँ,जानता हूँ अच्छी तरह ,

मत देवता मुझको बनाओ,

इंसान कहलाना ,चोट पहुँचाएगा।

 

जकड़ तो जकड़ ही है,

लोहे की हो या रेशमी,

मत बाँधों किसी भी बंधन में

हनन रफ़्तार का हो जाएगा।

 

 

अंधेरे उजाले,आशा निराशा,

मन को भरमाने का जतन है,

कदम रखे अगर तू जमाकर,

पतझर बहार हो जाएगा।

 

मेरा तेरा एक सुख है,

और दुःख भी एक ही है।

बात इतनी सी समझ लें

जीना खुशगवार हो जाएगा।

 

न तुम कुछ कहो,न मैं कहूँ कुछ भी

हर ओर छाई रहे ,एक चुप सी,

नयनों से बातें करेंगे,

शब्द बेकार हो जाएगा।

 

झिलमिलाता क्षितिज आगे,

मन में इन्द्रधनु कई जागे,

लक्ष्य प्रेरक बने तेरा ।

गति का संचार हो जाएगा।

 

धरती और आकाश बीच

जी रहा जो आदमी,

साथ गर उसका मिला तो,

जीवन उपहार हो जाएगा

 

वीणा गुप्त

नई दिल्ली

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