होते हैं वे बाबा की,आंखों के तारे….
सोकर सुबह उठें,प्रणाम वो करें
ड्रेस पहन कर , स्कूल को चलें
झगड़ा नहीं करें,दिन हँस के गुजारें….
जब घर को वे आएं,कुछ खेलें औ’खाएं
होमवर्क अपना करके, निश्चिंत हो जाएं
फिर पार्क में बाबा के संग,शाम गुजारें…..
जब सोने लगें वे,तो सुनते कहानी
दादी सुनाती है,था राजा और रानी
जाते थे हम भी बचपन में,नदिया किनारे….
बाबा सुनाते हैं ,भारत की कहानी
वो संस्कृतिअपनी,अध्यात्म की बानी
बड़े ध्यान से सुनते हैं,दोनों आंखों को फाड़े…
परिवार में हो प्रेम , यह अपनी विरासत
वसुधा से हो प्रेम,यह भारत की है ताकत
भारत है विश्वगुरु ,इसी ताकत के सहारे…
आशा बिसारिया चंदौसी






