सरकार की राहत योजनाओं पर विभागीय लापरवाही भारी, उपभोक्ता ने तकनीकी जांच और संशोधित बिल की मांग की
उपभोक्ता नें की सीएम हेल्पलाइन में शिकायत,समाधान ना होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी
रुड़की, हरिद्वार। सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने, सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा बिजली बिल का भार कम करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय से निस्तारण न होने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय विभागीय लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
रुड़की निवासी केशव पाण्डेय ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के अधिशासी अभियंता/एस.डी.ओ. को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि सोलर एक्सपोर्ट यूनिट का समायोजन नहीं होने के कारण उन्हें वास्तविक खपत से अधिक बिजली बिल भेजा जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने इस संबंध में पूर्व में 22 मई 2026 को भी शिकायत की थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान बिजली बिल में सोलर द्वारा उत्पादित एवं ग्रिड को निर्यात (एक्सपोर्ट) की गई यूनिटों का उचित समायोजन नहीं किया गया है। इससे वास्तविक उपभोग से अधिक राशि का बिल प्राप्त हो रहा है और उपभोक्ता को अनावश्यक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उपभोक्ता ने विभाग से स्मार्ट मीटर एवं सोलर नेट मीटर की संयुक्त तकनीकी जांच, मीटर में दर्ज Import एवं Export Units का सत्यापन तथा सोलर एक्सपोर्ट यूनिटों का समुचित समायोजन कर संशोधित बिजली बिल जारी करने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक विवादित राशि की वसूली अथवा किसी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि भविष्य में सोलर नेट मीटर की रीडिंग का सही समायोजन किए जाने के बाद ही बिजली बिल जारी किया जाए।
सोलर ऊर्जा को प्रोत्साहित कर उपभोक्ताओं का बिजली खर्च कम करने की सरकारी मंशा तभी सफल हो सकती है, जब मीटर रीडिंग, नेट मीटरिंग और एक्सपोर्ट यूनिटों का समायोजन पारदर्शी तरीके से हो। यदि शिकायत के बावजूद उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है तो इससे न केवल उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, बल्कि सरकार की राहत एवं ऊर्जा संबंधी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगता है।
अब देखना यह है कि यूपीसीएलल अधिकारी शिकायत पर कितनी शीघ्र कार्रवाई करते हैं और उपभोक्ता को वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित बिल तथा सोलर एक्सपोर्ट यूनिटों का लाभ कब तक मिल पाता है।






