मैंने बोये बीज प्यार के,
तन्हाई के मौसम में
फूल खिलेंगे यादों के!
ख़ूब तपेगी धरती जब,
आकुल होंगे तन-मन भी;
तब आषाढ़ की रिमझिम बन,
फूल झरेंगे यादों के।
गर्मी में ठंडक देते,
और सर्दी में गरमाते;
जब भी जैसी ज़रूरत हो,
फ़ूल लगेंगे यादों के।
जब गहरायेगा अंधियारा,
साथ न होगा साया भी;
तब राहों में जुगनू बन,
फ़ूल मिलेंगे यादों के।
दुनिया के शोर-शराबे में,
जब अपना परिचय खो दोगे;
तब फ़िर से पहचान मेरी
,फ़ूल बनेंगे यादों के!
-डॉ.दक्षा जोशी ‘निर्झ
रा’ अहमदाबाद,गुजरात।






