* यह मन बड़ा चंचल है कैसे इसे समझाऊ। मन की व्यथा हंस-हंस कर गाऊ या आंसुओं में गिनाऊ।
जब मन की व्यथा बिगड़ती है उससे कुछ दिखाई नहीं देता बस वही वही नजर आतीं हैं ।
* यारों उसकी हर अदा मन को भाती है उसके हर शब्द मन में मिश्री से खुल जाते हैं ।उसके हर शब्द धड़कन दिल में धड़क जाते हैं । उसके मजाकिया अंदाज लहू से रग रग में बह जाते हैं।उसकी मुस्कान कानों में पायल सी छनक जाती है। रात ख्वाबों खयालों में आकर वो मुझको सताती है । मैं उसे पकड़ने की कोशिश करता हूं,तो वो ठेंगा दिखा भाग जाती है।
* ख्वाबों-ख्यालों में खो जाता हूं ?और मन कचोटने लगता है । यार क्यों उससे बात करना छोड़ा, क्यों वो रूसवा हुईं,कई बार कारण जानने की कोशिश की मगर मन की बात को जान नहीं पाया ,मन में एक ठनक सी रह गई बाकी हवा उड़ा के ले गई साकी ।
*ऋषि-मुनियो ने अपने तप से मन को वशीभूत किया़। साधारण इंसान के लिए यह संभव नहीं है । मन से मजबूर होकर मैं उसके पीछे पीछे दौड़ पडता हूं।उसे नहीं देख मन मसोस के फिर लौट आता हूं । मुझे जवाब नहीं मिलता तो गुस्सा भी बहुत आता है ।
*शायद यही प्रेम की मिठास है जो, गुस्से में भी अमृत सी बरस जाती है ,फिर वो पीछे से हॉय कहकर डरा जाती हैं। क्या लिखूं में मन की कचोटन, जितना लिखे उतना ही दिल पर तीर चलाती है । कभी पुछने पे भीनहीं बतलाती है। अनजान बन सामने खड़ी हो जाती है । लेकिन यारों उसकी यही अदा मेरे कचोटन मन की मरहम बन जाता है । कभी सागर सा उफनता मन है ,तो कभी नदियों कि शांत लहरों सा आहे भरता है ।
मन की कचोटन पे काबू पाना इतना आसान नहीं लेकिन, मेरा मानना है यदि इंसान धीरज रखके कार्य करें तो शायद मन की
कचोटन पे फतह पा सकता है।
नाम शिवा सिहंल आबूरोड 🙏






