मैं बहुत थक गया हूँ, वक्त के थपेड़ों के साथ,
अब सुकून चाहता हूँ, तेरे सपनों के साथ।
बहुत दूर निकल आया हूँ, अपनी ही राहों में,
कुछ पल बैठना चाहता हूँ, तेरी ही पनाहों में।
जो दर्द मिला दुनिया से, वो दिल में दबा लिया,
हर बार मुस्कुराकर मैंने, अपना ग़म छुपा लिया।
अब और नहीं सहना मुझको, दुनिया के ये वार,
बस तेरी यादों में मिल जाए, थोड़ा सा प्यार।
न कोई शिकवा चाहिए, न कोई सवाल चाहिए,
बस थके हुए दिल को, तेरा ख्याल चाहिए।
बहुत शोर है दुनिया में, मन चुप होना चाहता है,
तेरे ख्वाबों की छांव में, कुछ पल सोना चाहता है।
जो टूट गया है अंदर से, उसे फिर जोड़ दे कोई,
इन सूनी आँखों में, थोड़ा सा नूर भर दे कोई।
मैं बहुत थक गया हूँ, वक्त के थपेड़ों के साथ,
अब सुकून चाहता हूँ, बस तेरे सपनों के साथ।
अगर जिंदगी फिर से, मुझे मुस्कुराना सिखाए,
तो मेरी हर खुशी में, तेरा ही नाम आए।
बस इतनी सी दुआ है, ऐ मेरे हमसफ़र,
थक जाए जब ये दिल, तू याद आना मगर।
कुलदीप सिंह रुहेला
सहारनपुर उत्तर प्रदेश






