आया पावन रक्षा पंचमी का त्योहार,
लाया खुशियों की सुंदर बौछार।
भाई-बहन के स्नेह का बंधन न्यारा,
जग में सबसे पावन और सबसे प्यारा।
माथे पर सजता है रोली का टीका,
इसके आगे हर एक रंग है फीका।
कलाई पर बंधती है रेशम की डोरी,
सजती है यादों की सुंदर सी कोठरी।
बहन मांगती है भाई की लंबी उम्र की दुआ,
जब-जब यह मंगलकारी दिन है हुआ।
भाई देता है रक्षा का पावन वचन,
खुशियों से महक उठता है हर एक मन।
बचपन की शरारतें और वो खट्टी-मीठी बातें,
याद आती हैं वो प्यारी-प्यारी रातें।
दूर रहकर भी दिल के पास रहते हैं,
सुख-दुख में सदा साथ-साथ बहते हैं।
थाली में सजती है मिठाई और दीप महान,
भाई की आरती उतारती बहन दे देकर मान।
यह धागा नहीं, यह तो अटूट विश्वास है,
हर एक भाई-बहन के लिए बेहद खास है।
दुआ है सदा बनी रहे यह सुंदर प्रीत,
सदा गूंजती रहे जीवन में स्नेह की गीत।
पंचमी की बेला लाई है सुखों का संसार,
मुबारक हो सबको रक्षा पंचमी का त्योहार।
स्वरचित एवं मौलिक
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश






