महोली, सीतापुर। महोली नगर स्थित श्री तुरंत नाथ बाबा के दरबार में आयोजित दिव्य एवं भव्य श्रीमद्भागवत महापुराण एवं श्रीराम कथा के भावपूर्ण आयोजन में शनिवार को सातवें दिन कथा व्यास रामानुजाचार्य ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन सुनाया।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण मोक्षदायिनी कथा है। सर्वप्रथम नैमिषारण्य में श्री सूतजी ने शौनकादिक 88 हजार ऋषियों को इस पावन कथा का श्रवण कराया था। उन्होंने राजा परीक्षित की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि कलियुग के आगमन से पूर्व राजा परीक्षित का शासन था। एक बार उन्होंने एक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिया, जिससे नाराज होकर ऋषि पुत्र ने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन सर्प के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी।
कथा व्यास ने कहा कि राजा परीक्षित ने मृत्यु से पूर्व सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा अमृत के समान है। इसके श्रवण से मनुष्य के दुख और दरिद्रता का नाश होता है। जिस स्थान पर श्रीमद्भागवत की कथा होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और दरिद्रता दूर होती है।
उन्होंने बताया कि श्री तुरंत नाथ धाम नगर का सिद्ध एवं भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसकी स्थापना लगभग 75 वर्ष पूर्व पंडित दुर्गा प्रसाद द्वारा की गई थी।
भागवत कथा के सातवें दिन नगर एवं आसपास के क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु, महिलाएं एवं नागरिक शामिल हुए। कथा के समापन अवसर पर भव्य भोजन भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।






