आए गणेशा भोले के

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इधर-उधर की बातें सुनकर,

जीवन में भरमाते हो,

तुम भोले में ध्यान लगाओ,

काहे को शरमाते हो।

इधर-उधर की बातें ….

जीवन हो बस सीधा-साधा,

बंधे राम-सी मर्यादा,

भोले से बस गांठ बांध लो,

नहीं आए फिर कोई बाधा।

इधर-उधर की बातें …

पाप-पुण्य की गठरी हमने,

बांध रखी जीवन में जितनी,

इसीलिए भोले कहते हैंं,

जैसी करनी-वैसी भरनी।

इधर-उधर की बातें …

शुभ ही शुभ होगा घर भर में,

सत्य ध्यान कर द्वेष तजो,

रिमझिम करती बारिश में भी,

भोले का तुम नाम जपो।

इधर-उधर की बातें …

भोले के अब आए गणेशा,

करें आरती मन भर कर,

भोग लगाएं लडुअन का हम,

और मुस्काएं जी भर कर।

इधर-उधर की बातें …

(283/341 वां मनका

कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’

गांधीनगर, इन्दौर (म.प्र.)

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