दर्द मिलेगा तो पूछूंगा
सितम हम पर ही ज़्यादा क्यों!!
आप तो कहते थे की वफ़ा होगी
फ़िर बेवफ़ाई का इरादा क्यों!!
बार-बार क्या रूठना ज़िन्दगी से
दिल टूट जाए ऐसा वादा क्यों!!
ज़िन्दगी के खेल भी निराले हैं
इश्क़ वालों को सताना क्यों!!
चंद लोग हैं जो ख़िलाफ़ है मेरे
पीड़ा इतनी मेरे ख़िलाफ़ ही क्यों!!
मेरा ज़िंदा रहना इत्तिफ़ाक़ है
आपकी कोशिशे नाकाफ़ी क्यों!!
मुद्दत हुई मैं चाँद तक नहीं गया!!
आज तेरा चेहरा मेरे पास क्यों!!
धीरे-धीरे चढ़ेगा रंग मोहब्बत का
इंसान इतना बेसब्र क्यों!!
लेना है तो मुझसे लो बदला
मेरे ज़मीर से इंतिक़ाम क्यों!!
बेशक हम बे-ख़याल नहीं
आप पर इतना ए’तिबार क्यों..!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान






