माह भादव शुक्ल पक्ष अष्टमी, राधा रानी का अवतरण दिवस ,आई भवानी।
जन्मदिन की बधाई बृषभान दुलारी ,भूमिपुत्री राधा रानी।
जन्म दिवस की बधाई स्वीकारो, बरसाने की राधा रानी ।
राधा रानी और गोकुल के कान्हा श्रीकृष्ण के, आत्मीय प्रेम की है अमर कहानी ।
श्रीकृष्ण के आत्मीय प्रेम में ,बरसाने की राधा रानी हुई दीवानी ।
प्रभु श्रीकृष्ण की मुरली ,राधे- राधे धुन सुनाती मस्तानी।
तब बरसाने से ,मुरली की धुन सुनकर ,दौड़ के आती राधा रानी।
निधिवन में कान्हा संग ,आत्मीय प्रेम रास रचाती राधा रानी।
गोप -गोपियों के संग कान्हा की, हंसी ठिठोली होती थी सुहानी।
मटकी फोड़ी ,करी छेड़खानी गोपियों ने कहा -यशोदा मैया से कहेंगे तुम्हारी शैतानी ।
गोपी वस्त्र चोरी की भी कहेंगे कहानी ।
हम नहीं करें शिकायत ,तो तुम्हें मुरली पड़ेगी सुनानी ।
कान्हा कहते -मुरली बजाऊंगा तुम्हें नचाऊंगा, पर तुम्हें माखन मिश्री, मुझे पड़ेगी खिलानी ।
राधे- राधे धुन गाती बांसुरी, खुश होता यमुना का पानी।
देवी -देवता हरसाते ,फूल बरसाते, जय हो राधेश्याम -जय राधा रानी।
राधा रानी के संग गोपिया मुस्कानी, राधे-राधे गोकुल में गूंजे मीठी वाणी।
बरसाने के लाड़ली मंदिर में ,आज भी मुस्कुराए राधा रानी ।
लठमार बरसाने की होली की रंगीनियाँ ,जग में जानी पहचानी।
कान्हा बोले -होली पर चलो बरसाने ,राधा रानी के संग रंग खेलेंगे, है धूम मचानी ।
पहुंची कान्हा की टोली बरसाने होली में, राधा और सखियों ने, लठमार होली खेल करी अगवानी।
राधे -राधे नाम जपो ,दुख -दर्द दूर करेंगी राधा महारानी ।
जय हो राधेश्याम ,जय हो राधा महारानी।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है।






