जिसके आंगन में खुशियों का सौहार्द सपन किलकारी लेता,
उसके घर में हर कोई तिरस्कृत का घाव उसे देता।
उसके साथ ही घर वाले सौतेला व्यवहार सब करते हैं,
साथ बैठाने में उसको शर्म महसूस करते हैं।
अपने ही घर में आज सम्मान को हिंदी तरसती है,
दिल की वेदना वो किसी से ना कभी भी कहती है।
चिंता जनक व्यवहार हमारी हिंदी भाषा संग होता हैं,
जो सर्वश्रेष्ठ भारत की भाषा सौतेला व्यवहार उससे होता हैं।
हिंदुस्तान में हिंदी को आओ मिलकर खूब सवारे,
गर्व से हिंदी भाषा का मिलकर नाम उच्चारे।
सम्मान से हिंदी बोले हम हिंदी में ही ही लिखारे,
मिलकर आओ हिंदी की हम दशा को सवारे।
हिंदी दिवस पर मिलकर आओ मिलकर प्राण करें,
ऑफिस दफ्तर या सम्मेलन में हिंदी में उच्चारण करें।
पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश






