हे_गणपति_हे_गजानना

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हे गणपति ,हे गजानना

थोड़ी कृपा करो हम पर

हे कृपानिधान ,

आते हो हर बरस यहां तुम

पर ,मेरी झोली रहती खाली -सदा ,

हे गणपति …..,

अंतर्मन में ले विश्वास,

गढ़ता हूँ मैं सुन्दर मूर्ति तुम्हारी,

फिर भरता हूँ रंग सुनहरे और,

लाल -पीले और अन्य रंगों में,

पर सोहे तुम्हे रंग सिंदूरी,

प्रिय वाहन मूषक के संग ,

हे गणपति …..,

बड़े प्यार और बड़े अरमान से,

बिकते हो तुम जल्दी जल्दी ,

और सहारा बनते हो तुम

हम दुखियों के पोषण का ,

हे गणपति ,हे गजानना

थोड़ी कृपा करो हम पर ..||

 

शशि कांत श्रीवास्तव

डेराबस्सी मोहाली ,पंजाब

©स्वरचित मौलिक रचना

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