महोली सीतापुर गुलरिहा स्थित सिद्धनाथ मंदिर पर आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान चल रही रामलीला में कलाकारों ने अहिल्या उद्धार का सजीव मंचन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंचन के दौरान भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा।
रामलीला में कलाकारों ने जनकपुरी में पड़े अकाल का प्रसंग प्रस्तुत किया। अकाल के कारण जनता त्राहि-त्राहि करने लगती है, जिसके समाधान के लिए विदेहराज संतों की शरण में पहुंचते हैं। संतों की सलाह पर राजा पत्नी के साथ खेत में हल चलाते हैं। इसी दौरान हल एक घड़े से टकराता है। घड़ा बाहर निकालने पर उसमें एक सुंदर बालिका दिखाई देती है। संतान न होने के कारण राजा-रानी बालिका को अपने साथ महल ले आते हैं। पृथ्वी के गर्भ से प्रकट होने के कारण उसका नाम सीता रखा जाता है।
इसके बाद रामलीला में राक्षसों के बढ़ते अत्याचार का प्रसंग दिखाया गया। गुरु विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंचकर राम और लक्ष्मण को ऋषि-मुनियों की रक्षा के लिए अपने साथ ले जाने की अनुमति मांगते हैं। पुत्र मोह के चलते राजा दशरथ चिंतित होते हैं, लेकिन गुरु वशिष्ठ के निर्देश पर दोनों राजकुमारों को विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं।
मार्ग में भगवान श्रीराम ताड़का और सुबाहु का वध करते हैं। जनकपुर जाते समय भगवान श्रीराम द्वारा अहिल्या उद्धार का मनोहारी मंचन किया गया। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
इस दौरान आयोजक राजकुमार कश्यप सहित सुरेश यादव, पंकज शर्मा, मनोज कश्यप, नीरज कश्यप, राम मोहन मिश्रा, रत्नेश कश्यप, पंकज कश्यप आदि मौजूद रहे।






