भादव माह सुदी पंचमी को, पर्व ऋषि पंचमी, सनातन धर्मी मनाएं।
सप्त ऋषियों -अत्रि , ‘गौतम, जमदाग्नि ,वशिष्ठ, विश्वामित्र, कश्यप, भारद्वाज के पूजन से पुण्य फल पाएं।
आओ सप्त ऋषियों की महिमा गाएं ,श्री चरणों में शीश नमाएं।
अत्रि ऋषि थे महा ज्ञानी ,तप की महिमा शब्दों में कहीं न जाए ।
ऋषि गौतम की पुण्य कहानी ,पत्नी अहिल्या को अभिशाप से शिला बनाएं ।
ऋषि जमदाग्नि तपस्वी ,बलशाली, विष्णु अवतारी- परशुराम के पिता कहलाए ।
महर्षि वशिष्ठ धर्म ध्वजा लहराई, गुरु माता अरुंधति की प्रभुताई, महिमा गाएं ।
ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र क्षत्रिय तपोबली महान, यश बढ़ाएं ।
ऋषि कश्यप ज्ञान के सागर ,ज्ञान बढ़ाए ,अज्ञान दूर भगाएं ।
ऋषि भारद्वाज ज्ञान ,आध्यात्मिक ज्योति जलाएं ,सदमार्ग दिखाएं।
सप्त ऋषियों का, ऋषि पंचमी पर पूजन करते, साथ में गुरु माता अरुंधति भी पूजी जाएं ।
चंदन -केसर -सफेद पुष्प- फल जनेऊ- वस्त्र -मिष्ठान चढ़ाकर ,भक्त महिमा गाएं ।
सत्य -अहिंसा -सेवा -संयम -प्रेम- दया -पावनता का मार्ग ,सप्त ऋषि बतलाएं ।
सप्त ऋषियों की अमर वाणी, मानव जीवन में सुख के फूल खिलाए।
राजस्वला स्त्री की अनजानी भूलों के पाप ,यह पर्व मिटाए ।
व्रती स्त्रियां, मोरधन फलाहार लेती, पूजन करके पुण्य फल पाएं।
सप्तऋषि आज भी गगन में ,सप्तर्षि तारामंडल में चमके, आशीष बरसाए ।
सप्तर्षियों ने राजकुमार ध्रुव को और रामायण रचयिता रत्नाकर डाकू -वाल्मीकि को सत्य मार्ग दिखाएं ।
वाल्मीकि , रामायण की रचना कर, विश्व में अमरता पाएं।
ध्रुव ,तारा गगन में उत्तर दिशा में अटल ,अमर हो दृढ़ संकल्प कराएं।
सप्त ऋषियों की महिमा अपरंपार, ऋषि पंचमी पर पूजन कर ,उनके प्रति आभार दिखाएं ,शीश नमाएं।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित और मौलिक है।






