गुब्बारे सा मुहं फुलाती अंग्रेजी हैरान

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क्या करूं किन शब्दों में हिंदी का बखा

प्रेम का गागर भरती हिंदी,

राष्ट्रगान में महान है हिंदी।

 

विशाल भारत की प्रखर आत्मा है हिंदी,

अंग्रेजी दरोगा की दामाद है हिंदी ।

 

सभी भाषाओं की बहना है हिंदी,

सभी कवियों की पहचान है हिंदी ।

 

अनपढ़ का ज्ञान ,उसकी शान है हिंदी,

देशवासियों की जागृत चेतना है हिंदी।

 

अंग्रेजों के माथे पर ध्वजा की लहराती हिंदी महान,

सरल मितव्यई,गुणों की खान हिन्दी जाने जिसे सारा जहान।

 

सर्वधर्म में समान है हिंदी,

शृंगार रस के माथे पे बोर सी सजे हिंदी

 

झरनों की धार सी पावन बहती है हिंदी

दिन दुगनी रात चौगुनी हरियाली सी लहराती है हिंदी।

 

साहित्य में शब्दों का सार हिंदी

सर्व भाषाओं में अनूठी बहार है हिंदी

 

दोहा छंद अलंकार में मोती सी चमकती है हिंदी

सैनिकों के तीर,तलवार , ताकत है हिन्दी

 

मेरे देश में बधाई की सौगात है हिंदी

सर्व भारतीयों की राजमाता है हिंदी

 

कुछ चाट सी चटपटी तो रसगुल्ले सी मितव्ययी है हिंदी

सुर,ताल,सरगम की बेटी हिंदी,हर हाल में अमर है हिंदी।

 

भूखों की थाली में रोटी है हिंदी

गरीबों के सर की चादर है हिंदी

 

अब क्या लिखूं में हिंदी का गुणगान

जितना लिखूं उतना कम ऐसी है मेरी हिंदी महान

 

हिंदी दिवस पे कलम मेरी। करे हिंदी को करे प्रणाम ,

हिंदी-दिवस पे सभी मित्रों मेरी कलम का प्रणाम ।

*नाम शिवा सिंहल आबूरोड*

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