वेदों की ऋचाओं में जिनका स्वर गूँजा।
जिनसे आलोकित हुआ भारत का आँगन।
ऋषि वशिष्ठ ने धर्म-पथ की राह दिखाई।
विश्वामित्र ने तप से रचा नया गगन।
ऋषि वाल्मीकि ने रामकथा को स्वर देकर।
मानवता का अमर संदेश सुनाया।
ऋषि वेदव्यास ने ज्ञान-सागर मथकर।
गीता का जीवन-दर्शन जग को बताया।
ऋषि भारद्वाज की साधना से विज्ञान खिला।
ऋषि अत्रि ने संयम का दीप जलाया।
ऋषि कणाद ने कण-कण में तत्त्व खोजकर।
जिज्ञासा को चिंतन का पथ दिखाया।
ऋषि पतंजलि ने योग-साधना सिखलाई।
तन-मन के संतुलन का मंत्र सुनाया।
ऋषि चरक ने औषधि-ज्ञान की धारा से।
जीवन-रक्षा का पावन दीप जलाया।
इन ऋषियों की तप-धरा आज भी कहती—
ज्ञान बाँटो, सत्य-सदाचार अपनाओ।
भारत की इस अमर ऋषि-परंपरा से।
अंतरतम में ज्ञान-ज्योति जगमगाओ।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार






