चलो आज नया सवेरा करते हैं
ख़ुशियों का आदान प्रदान करते हैं!!
ज़िन्दगी से तुमको क्या मिल गया
इस पर आप मेरी बात क्यों करते हैं!!
मुंँह फेर लेना तुम्हारी पुरानी आदत है
आओ आमने-सामने बात करते हैं!!
रूबरू अपने आईना रखकर
इसमें महफ़िल तलाश करते हैं!!
चेहरा एक ही क्यों नज़र आता है
चलो आईने से बात करते हैं!!
ख़ुदा का शुक्र है ज़िंदा है अब तक
वर्ना दर्द किसको सलाम करते!!
बे-वजह दिल बुझा बुझा सा है
आज ख़ामोशी की बात करते हैं!!
चांँद को हम नज़र नहीं आते
चलो जुगनूँ से बात करते हैं!!
तेरा ख़्याल जब से आया है
सुबह शाम तेरा ख़्याल करते हैं!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान






