लघु कथा  यह मेरा प्यार है 

Date:

पता नहीं दुनियां मै प्यार की क्या परिभाषा है कहते है अक्सर लोग प्यार याने रूप , यौवन और जिम्म का भोग पर जब यही लोग अपनी मां, बहन और ईश्वर से प्यार करते हैं तो इनकी परिभाषा बदल जाय है नहीं जानता ऐसे लोगों को जिनकी परिभाषा सोच और चिंतन बदलता रहता है राम जाने ऐसे लोगों को ये भी उसकी ही संतान है वही जान सकता है उन्हें

मुझे क्या करना मे तो प्यार को सदा ही पावन पवित्र धरा पर देखा है और सोचता हूं वहीं प्यार मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्रणियों से करता हूं जो मा से, पिता से, बहन और बेटों बेटी से करता हूं यही प्यार ईश्वर से करता हूं यही प्यार उनसे चाहता हूं जो मैं उन्हें करता हूं बस एक दूसरे का ख्याल और सुविधा चिंता सदा ही खुश रहे प्रसन्न रहे यही सबके लिए सोचता हूं यही प्यार उनसे चाहता है कुछ नहीं तो इतना समय तो निकाल सकते हैं कि ईश्वर से सदा ही मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्रणियों के लिए दुवाएं करे उनके सुखी जीवन की, उनके कल्याण की और देश और दुनिया की खुशहाली की काश दुनिया प्यार के असली चेहरे को असली रूप को समझती तो कभी भी दुःख, पीड़ा कष्ट जैसे भाव विचारों का जन्म नहीं होता

खैर अंत में यही कहना चाहता हूं जो सदियों पहले भी किसी महान व्यक्तित्व गीतकार ने फिल्म में कहां है कि प्यार को प्यार ही रहने दें कोई नाम न दे, जो लगत है उसे प्यार न कहे यह प्यार का अपमान है

 

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

Previous article
Next article

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

लेटेस्ट खबरें

गांव-समाज की खबरें
Related

अधूरी ख़्वाहिशों का उजाला

ज़िंदगी को हमेशा मुक़म्मल होने की ज़िद नहीं होती,कभी-कभी...

कुछ नालायक बेटों ने

कुछ नालायक बेटों ने बाप को विवश कर रखा है   कमाने...

ग़ज़ल 

मुझसे ज़मीर बेच के खाया नहीं गया। मज़बूर को कभी...

स्वाभिमानी स्त्री

लोगों ने मुझे तोड़ने की, हद से ज्यादा कोशिशें की। मैं...