बिकना या बेचना सीख लो
यह दुनिया बस व्यापार की।
वस्तु हो या जीवन-मूल्य हों
यही चिंता हरेक सरकार की।।
बिन पैसे के कोई नहीं पूछे
खाली जेब इज्जत न मिले।
योग साधना या धर्म कर्म हो
हरे क्षेत्र के यही सिलसिले।।
बेचने के नाम कुछ भी बेचो
इज्जत हो या आत्मसम्मान।
रुपया जेब में आना चाहिये
रुपये बिना नहीं बने इंसान।।
सच और झूठ जुड़े पैसे से
यही तराजू बचा संसार।
बैंक बैलेंस बढना चाहिये
चोरी, जारी चाहे व्यवहार।।
शिक्षा दीक्षा या परीक्षा हो
पाना हो चाहे कोई रोजगार।
कोचिंग सेंटर प्रतियोगिता
सर्वत्र चलता पैसा व्यवहार।।
शादी ब्याह या कपड़ा लत्ता
सत्संग जागरण,योग शिविर।
तीर्थयात्रा कोई करनी हो
पैसा घुसा हुआ सबके सिर।।
राजनीति चाहे धर्मनीति हो
तंत्र विद्या चाहे झाड़-फूंक।
बिन पैसे के मिलेंगे धक्के
टोटा जीवन सबसे बड़ी चूक।।
खाना, पीना,रहना, सहना
विश्वविद्यालय उच्च -शिक्षा।
प्रोफेसर सबसे गरीब यहां
भिखारी चाहिये पैसा भिक्षा।।
न्याय-व्यवस्था पैसा चलता
बिन पैसे नहीं जज,वकील।
ब्याह-शादी,छूछक, कोथली
बिन पैसे चलना मुश्किल।।
प्यार, प्रेम, स्नेह, वात्सल्य
पति-पत्नी पैसे का झगड़ा।
पैसा नहीं जिसकी अंटी में
दास बनाये उसको अगड़ा।।
पैसा धर्म यहां पैसा कर्म है
पैसा ही पद सबसे बड़ा।
बिन पैसे के मोक्ष न मिलता
भव- सागर से तंबू उखड़ा।।
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डॉ. शीलक राम आचार्य
वैदिक योगशाला






