*विश्वकर्मा जयंती (पूजा) का पावन शुभ अवसर*
सृष्टि सृजनकर्ता हे!भगवान,विश्वकर्मा तुम्हें है प्रणाम।
तुमको शत शत नमन करूँ,शत शत वंदन है प्रणाम।।
हे!विश्व शिल्पी श्रेष्ठदेव जी,भगवान विश्वकर्मा महान।
तुम्हें कोटि कोटि वंदन मेरा,जगत के तू प्रतिभावान।।
तुमने बनाया द्वापर युग में,अति सुंदर द्वारिका नगरी।
त्रेता युग में तुम्हीं बनाए,स्वर्ण लंका जैसी भी नगरी।।
तुम महान रचनाकार,शिल्पकार वास्तुशास्त्र के ज्ञानी।
परमपिता ब्रह्मा जी के पुत्र,निर्माण सृजन के स्वामी।।
सुंदर इंद्रप्रस्थ बना कर,इंद्रलोक बनाए विश्वकर्मा जी।
अतिशय सुंदर स्वर्गलोक,तुम्हीं बनाए विश्वकर्मा जी।।
त्रि-देवों ने सृष्टि निर्माण हेतु,जब सब ने तुम्हें पुकारा।
नव निर्माण सृजन कर तुमने ही,सृष्टि को है संवारा।।
युग-युग से तुम ही तो केवल,एक श्रेष्ठ शिल्पकार हो।
सभी देव देवी के प्रिय हो,तुम ही महाशिल्पकार हो।।
यंत्रों पुर्जों यांत्रिकी कारखानों,के तुम्हीं महान देवता।
इसीलिए तुम्हें पूजे कल कारखाने,विश्वकर्मा देवता।।
श्रमिकों मजदूरों मालिकों को,समृद्धि के दो वरदान।
कार्य कुशल परिश्रमी रहें सदा,जीवन में पाएँ मान।।
सत्रह सितंबर को हर वर्ष,होती है विश्वकर्मा जयंती।
प्रतिष्ठानों के मालिक श्रमिक,सब मनाते हैं जयंती।।
स्कूलों यांत्रिक शैक्षणिक,तकनीकी संस्थानों में मने।
धूम धाम से भगवान विश्वकर्मा,जी की जयंती मने।।
हे ! वास्तु शास्त्री हे! शिल्पकार,हे ! श्रेष्ठ अभियंता।
हे ! सृजन देव हे!महाशिल्पी,हे! कुशल अभियंता।।
हे! विश्वकर्मा भगवान तुम्हारी,जय हो जय जय हो।
हे!सर्वश्रेष्ठ महान शिल्पकार,तुम्हारी जय जय हो।।
भगवान विश्वकर्मा जयंती की,बधाई-शुभकामनाएँ।
आपको सपरिवार ढेरों मेरी,हार्दिक शुभकामनाएँ।।
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रचयिता :
*ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.
(शिक्षक कवि लेखक साहित्यकार समीक्षक एवं समाजसेवी)
पूर्व संरक्षक-यू.पी.एम.एस.एस.,पी.बी.सी.यूनिट,प्रतापगढ़






