हिंदी भारत की जन भाषा, वर्ण -वर्ण है पुष्प समान।
अक्षर – अक्षर में खुशबू है, सिंध नाम से हिंदुस्तान।।
मीठी- मीठी हिंदी भाषा, जोड़ रही बिछड़े परिवार।
परदेसी भी लौट रहे हैं , खींच रहा है घर का द्वार।।
मोहक माटी हिंदी धरणी, भारतवासी का अभिमान।
हिंदी ….
हिंदी में ही सब बात करें ,नहीं हिचकिचाना है आज ।
घर के अंदर हो या बाहर , हिंदी में हो सारे काज।।
आने वाली पीढ़ी का भी, करना है आकर्षित ध्यान।
हिंदी …..
प्रथम अधर से निकली हिंदी,भले तोतला था वह बोल ।
सुनकर झूमे सारे अपने,वह क्षण था कितना अनमोल।।
हिंदी ने इतिहास सजाया, हिंदी से जीवन उत्थान।
हिंदी ….
नानी- दादी कथा सुनाएं, हिंदी में ही गाती गीत।
श्वास- श्वास धड़कन में हिंदी , निभा रही हिंदी में रीत।
मंत्र श्लोक से पीड़ा भागे।
छुपा भेद अनगिन विज्ञान।।
हिंदी भारत की जन भाषा, वर्ण- वर्ण है पुष्प समान।
अक्षर -अक्षर में खुशबू है सिंध नाम से हिंदुस्तान।।






