परोपकार का दीप जलाऍं,
तिमिर घनेरे दूर भगाऍं।
जीवन में खुशियाँ भर दो,
सुप्त मन में सुमन खिलाफ।
परोपकार का दीप प्रज्ज्वलित
करते जाना।
जग को देना सदा उजाला प्रेम करते जाना।
अगर कभी भी गलती होती क्षमा मांग तुम लेना,
त्याग भाव से मन को सुंदर करते जाना।
नेह गेह मन सदा ही भरना,
द्वेष भावना मत मन रखना।
भेदभाव को दूर ही करना,
मानवता मन हरदम धरना।
कष्ट कभी मत किसी को देना,
राहें सुख की सदा ही चुनना। फूल बिछाना राह में तुम सभी के,
हर उपवन गुलज़ार करना।
स्वरचित
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश






