तीज का त्योहार मनाएं,शिव परिवार को पूजें अँगना।
हे!शिव-गौरी गणेश,दीर्घायु रहें पति-सुहागन रखना।।
श्रृंगार करी सुहागिनें,गौरी को चूड़ी बिंदी वस्त्र चढ़ाएँ।
फल फूल मेवा मिष्ठान सब,पार्वती माँ को वे चढ़ाएँ।।
कठिन निर्जला व्रत रखें,सुहागिनें कथा पढ़ें व सुनाएँ।
पूजन वंदन आराधन आरती,से तीज त्योहार मनाएं।।
नीम के डाल पड़ा झूला,पेंगियां मार झुलाए सजनवा।
पाँवों महावर हाथों मेंहदी,सोलहों श्रृंगार है सजनवा।।
रूपवा सोहे जो तुमको,आओ मुझे सजाओ बलमवा।
भाद्र माह ठंडी फुहार संग,मौसम अलबेला बलमवा।।
हरी चूड़ियाँ स्वर्ण कंगन हाथों में,नाके नथ माथे बिंदी।
गोटा वाली लाल चुनरिया,सुहागिनों की सिंदूर बिंदी।।
कनक अँगूठी भरी उंगलियाँ,रजत पायल झनके पाँव।
सजी सँवरी सुहागन दुल्हन का,मनमोहक रूप पाँव।।
हरतालिका तीज पर्व पर,सुहागिनें करें सोलह श्रृंगार।
करवा चौथ पर्व पर भी,करें सुहागिनें सोलह श्रृंगार।।
हरियाली तीज पति-पत्नी प्रेम,व शिव-गौरी का पर्व।
सनातन वैदिक हिन्दू धर्म का,पावन पुनीत यह पर्व।।
हँसी खुशी आनंद उत्सव,श्रृंगार का सुहावन त्योहार।
आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ प्यार।।
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रचयिता :
*ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.






