यात्रा जीवन की सरल रहे,
बस यही कामना है मेरी।
पथ में चाहे धूप मिले,
या छाँव रहे सुखद, घनेरी।।
मन में विश्वास सदा जागे,
होठों पर मुस्कान रहे।
दुःख की आँधी आए चाहे,
मन न कभी हैरान रहे।।
सत्य-धर्म का दीप जलाकर,
दूर करूँ हर रात अँधेरी।
यात्रा जीवन की सरल रहे,
बस यही कामना है मेरी।।
रिश्तों में मधुरिता घुलती हो,
प्रेम रहे व्यवहारों में।
सेवा, करुणा, त्याग समाए,
जीवन के संस्कारों में।।
अपने सुख से बढ़कर चाहूँ,
खुशियाँ जग की बनें सुनहरी।
यात्रा जीवन की सरल रहे,
बस यही कामना है मेरी।।
मंजिल चाहे दूर हो कितनी,
कदम कभी न रुकने पाएं।
काँटों से यदि राह मिले तो,
हँसकर उनको पार कर जाएँ।।
मेहनत को अपना साथी मानूँ,
आशा मन में हो अति गहरी।
यात्रा जीवन की सरल रहे,
बस यही कामना है मेरी।।
मोह-माया के जाल में उलझूँ,
तब भी राह न भूलूँ अपनी।
मन-मंदिर में प्रभु को रखकर,
साँस-साँस हो पूजा अपनी।।
अंत समय जब हो यात्रा पूरी,
शांत रहे यह आत्मा मेरी।
यात्रा जीवन की सरल रहे,
बस यही कामना है मेरी।।
शिव की कलम यही लिखती है,
जीवन हो परहित दर्पण सा।
जिससे मिलूँ प्रेम ही बाँटूँ,
सेवा-कर्म हो आभूषण सा।।
जग में रहकर जग के हित में,
बीते जीवन-साँझ सुनहरी।
यात्रा जीवन की सरल रहे,
बस यही कामना है मेरी।।
कविराज डाॅ०-शिवकुमार सिंह ‘शिव’
दुसौंती रायबरेली-२२९३०६
639222932ड






