विज्ञान तर्कों की कसौटी पर, जग का सत्य परखता है,
साहित्य मन की गहराई में, मौन भाव को पढ़ता है।
विज्ञान कहे -व्यावहारिक प्रयोग, प्रमाणों का अनुशासन,
हिंदी में धड़कता प्रेम, करुणा, नेह और अंतःस्पंदन।
जब सूत्रों की नीरव दुनिया से मन मेरा भर जाता है,
तब शब्दों का एक दीपक, अँतरतम में उतर जाता है।
विज्ञान जहाँ परिणामों तक, अपनी यात्रा पूर्ण करे,
साहित्य वहाँ आशाओं के, नूतन नभ में पंख भरे।
मन जब शांति और संवेदना की निर्मल सरिता चाहती है,
नीलचित्रा साहित्य की गोद में आकर, स्वयं को फिर पाती है।
नीलचित्रा व्यास (चित्रलेखा व्यास)
कानोड़, उदयपुर (राजस्थान)






