मध्य प्रदेश आदिवासी जिले झाबुआ में दस्तक देते हुए सारी दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम डॉ रामशंकर चंचल की नई कविता , अकेला होना को उन्हीं के अद्भुत उम्दा स्वर में बेहिसाब प्रतिक्रिया द्वारा लाखों लोगों द्वारा सराही गई और उन्होंने अपनी अनेक अनेक संस्थाओं द्वारा कालेजो द्वारा हजारों हजारों युवा पीढ़ी को सुनाई गई यह अमर कविता आज लाखों चाहने वालों के दिल और दिमाग में दस्तक दे अमर हो गई
कविताएं अकेला होना को एक लाख चार हज़ार द्वारा सराही गई
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