दो अक्टूबर 

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लाल थे भारत माता के , बहादुर लाल कहलाये ।

सादगी जीवन में जिनके, इसी से जन जन को भाये ।।

था कद छोटा ही जिनका , हृदय विशाल पाया था ।

करू गुणगान मैं उनका , उनके आदर्श अपनाये ।।…………..२

 

नाटक हरि चन्द्र का देखा , सहारा सत्य का पाया ।

अहिंसा सत्य से शासन, था गोरो का भी थर्राया ।

गान गीता व प्रभु का ध्यान , हमेशा ही किया करते ।

शक्ति भारत में कितनी है , यथा जो गुणियों ने गाया ।…………..३

 

श्री मद् भगवत गीता जी का जिसने लिया सहारा ।

क्रांतिकारी अमर शहीदों और मोहन दास हमारा ।।

सत्य अहिंसा को अपनाया कर हरि नाम का सुमरन ,

कहें महात्मा गांधी जिसको विश्व गगन का तारा ।।…………४

 

राजेश तिवारी ‘मक्खन’

झांसी उ प्र

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