वृद्धजनों की सेवा कर लो,
यही परम आचार
न……..
बड़ों की सेवा जो है करता,
आयु,विद्या,यश,बल बढ़ता
उसके शीश पै आशीषों की ,
होती है बौछार
न……
ज़रा में मन कोमल हो जाता,
पीड़ा तनिक नहीं सह पाता,
दुख न दो तुम उनके मन को,
वे हैं दैव साकार
न…..
तुमको जीवन ज्ञान सिखाया
तुम पर अपना नेह लुटाया
संबल उनके मन को देना,
जब वे हों लाचार
न……
जब वे जग को छोड़ जाएंगे
सच मानो तब याद आएंगे
देख नहीं पाओगे उनको,
तुम सब ओर निहार
न……
आशा बिसारिया चंदौसी






