विविध

आओ शांतिमय विश्व बनाएँ

आओ, एक दीप जलाएँ, मन के भीतर उजास जगाएँ। इतना उजाला हो जाए कि कोई चेहरा भय से न झुके, किसी माँ की आँख अपने बच्चे के लिए न...

स्त्री एक मन कई संसार

स्त्री चलती रहती है, एक मन में कई संसार लिए। अपनी ख्वाहिशों को छोड़, अपने रिश्तों की खातिर जिए।   बेटी बनकर आंगन में खेलती, बहन बनकर उठाती जिम्मेदारियां। पत्नी बनकर...

आँगन की आख़िरी चिड़िया

*अंक–28 : प्रकृति का कहर*   आर्यन की शादी में अब केवल पंद्रह दिन शेष थे।   घर में तैयारियाँ पूरे जोर-शोर से चल रही थीं। कभी कपड़ों...

वक्त का बदलता मिज़ाज है 

इंसान को अक्ल और गलतियाँ हमेशा डराने का काम करती हैं, अक्सर अपनी अक्ल और दूसरों की गलती हमेशा ज्यादा ही दिखती हैं।   स्वयं को संभालने के लिए...

सावन-भादो

सावन-भादो गरज बरसकर, जियरा खुब तड़पायो। राह तकत अब साँझ भई है, पिया घरे नहिं आयो।।   घन-घोर घटा घिरि आई, बिजुरी चमकै अँगनाई। भीजि गई चुनरी तन...

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