मुझे स्कूल भेजो

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घर का सारा काम करूँगी,

मम्मी स्कूल भेजो न।

अनपढ़ न रह जाऊँ मैं,

मुझको स्कूल भेजो न।

 

पेन कॉपी पेंसिल लेकर,

मैं स्कूल में जाऊँगी।

पढ़ – लिखकर के ,

कलक्टर बन जाऊँगी।

 

बत्ती वाली गाड़ी ,

घर अपने मैं लाऊंगी।

जिले की मुखिया बनकर,

सबका दर्द मिटाऊंगी।

 

कन्या की पूजा करते,

मम्मी घर- घर देखा है।

दुर्गा माँ का रूप मानकर,

चरणों को पूजा जाता है।

 

ओलंपिक के खेल खेलना,

मम्मी मैं भी चाहती हूँ।

खेल के मैदानों में जा,

मेडल जीतना चाहती हूँ।

 

अक्षर -अक्षर जोड़ दूंगी

टूटा फूटा लिख डालूँगी।

बाल कविता लिखकर,

मैं शाबाशी पाऊंगी।

 

नन्हे- नन्हे कदम मेरे,

मंजिल तय कर पाएंगे।

मुझे विश्वास है खुद पर,

सपनों को सच कर पाएंगे।

 

-डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित

भवानीमंडी

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