विश्व में -भारत में 18 सितंबर को, हर वर्ष बांस दिवस मनाया जाता।
पेड़ बांस संवर्धन का प्रयास किया जाता,महत्व बताया जाता।
बांस पेड़ ,धरा को हरियाली से सजाता ।
बांस पेड़ ,प्रचुर मात्रा में है ऑक्सीजन प्रदाता।
बांस आंधी में टूटता नहीं, झुक जाता फिर उठ जाता।
पेड़ देता संदेश “संघर्ष में टूटना नहीं ,झुकना फिर उठना” सिखाता।
बांस के अनेक उपयोग -टोकनी, बंबू फर्नीचर ,सजावट सामग्री से हस्तशिल्प रोजगार दिलाता।
छपाई कागज का मुख्य स्रोत बांस, पुस्तक, ग्रंथ प्रकाशन ,लेखन में अहम भूमिका निभाता।
बचपन में खिलौनों से ,खेल खिलाता।
बांसुरी ,तानपुरा बनाता, मानव मन को संगीत से रिझाता ।
बुढ़ापे में बनता लाठी का सहारा, अंतिम यात्रा में भी साथ निभाता।
यौवन में अखाड़े की लाठी ,शौर्य पराक्रम से दुश्मन को हराता ।
बांस का औषधि गुण है दिव्य, वंशलोचन औषधि बनती जो प्रोटीन प्रदाता।
घर के छप्पर, रेस्टोरेंट ,कुटिया बनाने के काम आता।
बांस के मचान ,सीढ़ी बनते ,जिनसे बिल्डिंग बनवाता- पुताई करवाता।
बांस श्रीकृष्ण प्रभु की बांसुरी बनाता, सुंदर तान सुनवाता ।
डंडा बन पशु चरवाता, लाठी बन रक्षा करवाता,औरों को धमकाता।
बांस पेड़ है मानव का घनिष्ठ मित्र, बचपन से लेकर जीवन पर्यंत साथ निभाता।
कम पानी में धरती को हरा बनाता, जल्दी बढ़ता ,कमाई बढ़ाता ।
शुभ कार्य शादी में बांस ,शादी का मंडप सजाता ।
जितना काटो उतना बढ़ता ,बिना निवेश किए व्यापार बढ़ाता।
पावनता का प्रतीक है बांस ,मजबूत डंडे से झंडा, बैनर लहराता ।
18 सितंबर को, विश्व बांस दिवस मनाया जाता ,जो बांस पेड़ का महत्व बताता ।
रचयिता
डॉक्टर शशिकला अवस्थी इंदौर मध्य प्रदेश
रचना स्वरचित मौलिक है।






