अंशी, सुकून महसूस हुआ
सालों बाद फिल्म देखने गया था, सोचा हनुमान जी पर केंद्रित है, बैठ सकता हूं इतनी देर टॉकीज में
और वही हुआ, पहली बार झाबुआ में नया टॉकीज देखा वैसे तो कई साल हो गया इससे भी करीब दस से ज्यादा समय हो गया मैं पहली बार सालों बाद कोई फिल्म देखी
हनुमान अंशी, सुकून महसूस हुआ अद्भुत प्रस्तुति, वंदनीय कथा, सुखद अभिनय और प्रभाव शाली निर्देशन में दस्तक देती फिल्म अंत तक बांधे रखती हैं
राजनीति की सड़ी मानसिकता से सुदूर एक सार्थक सोच लिए फिल्म है
ईश्वर को मानते है सभी लोग पर सब कुछ लिए होते है मन में राग देष छल कपट और ऊंच नीच, अमीर गरीब आदि आदि सैकड़ों बैराग आलाप रही दुनियां से भरे हुए है सभी और फिल्म बताती हैं कि ईश्वर सब कुछ देख रहा है जानता है कि तुम्हारे मन में क्या है यह अद्भुत सत्य को अक्सर में व्यक्त करता हूं और आज वही हनुमान अंशी में देख सचमुच सुकून मिला
पेड़ पशु पक्षी नदी पहाड़ आदि आदि में कण कण में ईश्वर है और सभी ईश्वरीय रूप है सब कुछ समझते हैं बात करते है और यही सब कुछ अक्सर में दस्तक देता अपने अक्सर आलेख में जिसे लोग मजाक बना लेते है वह लोग जो भगवान को खूब मानते है ,
आज वही बात हूं बू हूं देखने को मिली मुझे, हनुमान अंशी फिल्म में सचमुच बहुत बहुत सुकून मिला सोचा में गलत नही लिखता हूं, धर्म की राजनीति में अंधे लोगों को यह अद्भुत सत्य फिल्म देखने जाना चाहिए जो अक्सर यह धरती हमारी है यह देश हमारा है
हम है इस के मालिक आदि आदि
अहम समेटे हुए नादानों को शायद यह फिल्म अक्ल दे
पूरी फिल्म हनुमान चालीसा पाठ पर दस्तक देती हुई प्रभु राम के महत्व और अस्तित्व को सामने रखती हैं जो सचमुच वंदनीय है
राम है सालों से सदियों से धरती पर विराजमान, राम है तो दुनियां है खुशनुमा जीवन है सुख सुकून है और यह राम कण कण में वास है हर मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्रणियों के साथ है यह अद्भुत सत्य स्वीकार करना होगा और मानवीय सोच और चिंतन लिए जिंदगी को सुख सुकून से व्यतीत करते हुए सदा ही मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्रणियों को प्यार और प्यार करना होगा सभी हां तभी पुनः रामराज्य की कल्पना सार्थक होगी
काश दुनिया समझती कि ईश्वर एक है जो सदा ही सबके साथ है और वह सदा ही मानव मात्र पशु पक्षी सभी के दिल में वास करता है और यही सोच लिए जीता हुआ में जब मानव मात्र पशु पक्षी सभी को प्रतिदिन प्रणाम करता हूं तब भी अक्सर लोग इसे मजाक बना लेते हैं दुःख तब ज्यादा होता हैं यह मजाक पढ़े लिखे लोग करते हैं
खैर साहब जय हनुमान अंशी फिल्म सत् सत् वंदन
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश






