तुम शायद
नही जानता
तुम्हारी यह मुस्कुराहट
स्नेह, प्यार
मेरे लिए
किसी ज्ञानपीठ पुरस्कार से
कम नहीं है
बल्कि सच तो यह कि
वह एक बार ही मिलता है
और जिंदगी भर उस
खुशी को समेटे रखने का
प्रयास करना पड़ता हैं
लेकिन तुम्हारा
स्नेह,प्यार, अपनापन
हर शाम नसीब होता हैं
और पता हूँ
किसी ज्ञानपीठ पुरस्कार सी
खुशी, उमंग और ऊर्जा
तुम्हीं सोचो
मैं दुनियां का
कितना खुशनसीब
इंसान हूं
डॉ रामशंकर चंचल






