रचना शीर्षक
दुनिया के इस तमाशे में किरदार बेदाग रखना
विधा।। गीत
दुनिया के इस तमाशे में किरदार बेदाग रखना।
ले जाने को साथ मत कोई भी द्वेष- राग रखना।।
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चार दिनों की चांदनी और आनी फिर अंधेरी रात है।
तेरे अच्छे कामों का सुफल ही जीवन की सौगात है।।
मत बिगाड़ दे कोई कुछ यूं बचा अपना भाग रखना।
दुनिया के इस तमाशे में किरदार बेदाग रखना।।
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तेरी अदाकारी तेरी कहानी सब को ही याद रहे।
दुनिया के तमाशे में तेरी फनकारी पर सबकी दाद रहे।।
देखना अपने व्यवहार बोल में न ही कोई दाग रखना।
दुनिया के इस तमाशे में किरदार बेदाग रखना।।
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तुम खुद हाथ की लकीरें अपना जमीं आकाश बनाओ।
अपने पसीने की स्याही से अपना इतिहास बनाओ।।
अपनी बुद्धि विवेक वाणी में कभी मत तुम आग रखना।
दुनिया के इस तमाशे में किरदार बेदाग रखना।।
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इसी जन्म में अपनी करनी का कुफल भोगना पड़ता है।
स्वयं ही जीवन परीक्षा में सफल रास्ता खोजना पड़ता है।।
श्रम से कमाए धन से ही अपना रोशन चिराग रखना।
दुनिया के इस तमाशे में किरदार बेदाग रखना।।
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रचयिता।।एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली।।
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