जय विश्वकर्मा जी महाराज।
देवशिल्पी करते सब काज ।।
कन्या राशि सूर्य जब आते ।
तब तुम्हारा अवतार बताते ।।
तुमने ही द्वारिकापुरी बनाई।
हस्तिनापुरी अद्भुत सजाई ।।
सूर्यनारायण तेज कम कीन्हां।
सुदर्शन त्रिशूल दिव्य कर दीन्हा।।
जगन्नाथ पुरी आये थे आप ।
दिव्य मूर्ति बना रहे थे नाप ।।
कार्य बीच विघ्न जो आया ।
तुम्हें वह बिल्कुल न भाया।।
देव शिल्पी मैं करू प्रणाम।
सब सन्तन को जय श्री राम।।
डा राजेश तिवारी मक्खन
झांसी उ प्र






